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बैंकिंग सेवाएँ

मध्यस्थ बैंक सेवाएँ

मध्यस्थ बैंक सेवाएँ

जब प्रेषक बैंक और प्राप्तकर्ता बैंक के बीच प्रत्यक्ष कॉरेस्पोंडेंट संबंध नहीं होता, तब मध्यवर्ती बैंक अंतरराष्ट्रीय अथवा सीमा-पार लेन-देन में माध्यम की भूमिका निभाता है। मध्यवर्ती बैंक के प्रेषक और प्राप्तकर्ता बैंकों के बीच प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए कुछ संबंधों और व्यवस्थाओं का होना आवश्यक है:

1. कॉरेस्पोंडेंट बैंकिंग संबंध:

  • प्रेषक बैंक के साथ: मध्यवर्ती बैंक का प्रेषक बैंक के साथ कॉरेस्पोंडेंट बैंकिंग संबंध होना आवश्यक है। इसमें एक-दूसरे की ओर से सेवाएँ प्रदान करने और लेन-देन का निपटान करने के लिए पारस्परिक समझौते शामिल हैं।
  • प्राप्तकर्ता बैंक के साथ: इसी प्रकार, मध्यस्थ बैंक का प्राप्तकर्ता बैंक के साथ कॉरेस्पोंडेंट संबंध होना आवश्यक है। इससे मध्यस्थ बैंक निधि को आगे प्राप्तकर्ता बैंक को अंतरित कर पाता है।
  • नोस्ट्रो खाता: यह वह खाता है जो एक बैंक किसी अन्य बैंक में रखता है, सामान्यतः उस बैंक की मुद्रा में (यहाँ, मध्यवर्ती बैंक के पास)। अंतरण को सुगम बनाने के लिए प्रेषक बैंक का मध्यवर्ती बैंक के पास नोस्ट्रो खाता हो सकता है।
  • वोस्ट्रो खाता: इसके विपरीत, मध्यस्थ बैंक प्रेषक या प्राप्तकर्ता बैंक के लिए वोस्ट्रो खाता रख सकता है, जिससे वह उनकी ओर से निधियों का प्रबंधन कर सकता है।

2. SWIFT नेटवर्क सदस्यता:

संबंधित बैंक सामान्यतः SWIFT (सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फ़ाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन) नेटवर्क पर भुगतान निर्देशों का आदान-प्रदान करते हैं, या तो प्रत्यक्ष SWIFT उपयोगकर्ता के रूप में या उन्हें जोड़ने वाले किसी बैंक के माध्यम से। नवंबर 2025 से सीमा-पार भुगतान संदेश ISO 20022 (pacs.008, pacs.009) का उपयोग करते हैं।

3. समाशोधन एवं निपटान प्रणालियाँ:

मध्यस्थ बैंक के पास अंतरराष्ट्रीय क्लियरिंग एवं निपटान प्रणालियों तक पहुँच होनी चाहिए, जो उसे विभिन्न मुद्राओं और बैंकिंग क्षेत्राधिकारों के बीच लेन-देन को संसाधित और निपटाने में सक्षम बनाती हों।

4. विनियामक अनुपालन तथा KYC/AML नीतियाँ:

  • कॉरेस्पोंडेंट उचित परिश्रम (ड्यू डिलिजेंस): मध्यवर्ती बैंक को उन बैंकों के संबंध में उचित परिश्रम (ड्यू डिलिजेंस) करना होगा जिनके खाते वह धारण करता है (FATF अनुशंसा 13), जिसमें उनका स्वामित्व, पर्यवेक्षण और AML नियंत्रण शामिल हैं।
  • धन-शोधन निवारण (AML): अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए AML विनियमों का अनुपालन अत्यावश्यक है। मध्यवर्ती बैंक को संदिग्ध गतिविधियों के लिए लेन-देन की निगरानी करनी चाहिए।

5. ऋण एवं जोखिम प्रबंधन अनुबंध:

मध्यवर्ती बैंक, लेन-देन से जुड़े वित्तीय जोखिमों के प्रबंधन हेतु प्रेषक और प्राप्तकर्ता बैंकों के साथ ऋण सीमाएँ अथवा जोखिम प्रबंधन संबंधी समझौते स्थापित कर सकता है।

6. शुल्क एवं प्रभार संबंधी अनुबंध:

मध्यस्थ बैंक की सेवाओं के उपयोग से जुड़े शुल्कों और प्रभारों पर स्पष्ट सहमति होनी चाहिए, जिनमें मुद्रा रूपांतरण शुल्क, लेन-देन शुल्क और हैंडलिंग प्रभार शामिल हैं।

7. प्रौद्योगिकीय अनुकूलता:

सुचारु संचार और लेन-देन प्रसंस्करण सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों की बैंकिंग प्रणालियों का तकनीकी रूप से परस्पर संगत होना आवश्यक है। इसमें संगत भुगतान प्रसंस्करण प्रणालियाँ और संदेश प्रारूप सम्मिलित हैं।

औपचारिक अनुबंध प्रत्येक पक्ष के दायित्वों, देयताओं और बाध्यताओं को निर्धारित करते हैं। ये समझौते विवादों के समाधान और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।

9. संचार प्रोटोकॉल:

संवाद के स्थापित प्रोटोकॉल यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी पक्ष लेन-देन प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले किसी भी मुद्दे का शीघ्र और प्रभावी ढंग से समाधान कर सकें।

इन संबंधों और समझौतों की स्थापना द्वारा, मध्यस्थ बैंक प्रेषक और प्राप्तकर्ता बैंकों के बीच लेनदेन को प्रभावी ढंग से सुगम बना सकता है, भले ही उनके बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो। संबंधों का यह नेटवर्क सुनिश्चित करता है कि धनराशि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार सुरक्षित और कुशलतापूर्वक अंतरित हो।